Part 2 : बच्चों के लिए लघु कहानियां, जिससे बच्चों में होगा नैतिक मूल्यों का विकास
Part 2 : बच्चों के लिए लघु कहानियां, जिससे बच्चों में होगा नैतिक मूल्यों का विकास
1. शरारत पड़ी महंगी
एक चरवाहे का लड़का बहुत शरारती था। वह पशुओं को चराने के लिए जंगल ले जाता था। एक दिन वह चिल्लाया- भेड़िया आया, भेड़िया आया। उसे बचाने के लिए सभी गांव वाले दौड़ पड़े। जब वे ढूंढने निकले तो वहां कोई भेड़िया नहीं था। शरारती लड़का गांव वालों को परेशान होते देख जोर-जोर से हंस रहा था। अगले दिन उसने फिर वही काम किया। गांव वाले मदद के लिए आए, लेकिन वह उनकी मूर्खता पर हंसता था। एक दिन हकीकत में वहां भेड़िया आया। अब लड़के ने मदद के लिए बहुत शोर मचाया, चीखा-चिल्लाया, लेकिन अफसोस ! कोई भी गांव वाला उसे बचाने नहीं आया। अंतत: भेड़िया ने लड़के को मार डाला।
2. शेर ने चुकाया एहसान
एक गुलाम व्यक्ति था। उसका मालिक बहुत ही निर्दयी था। इसलिए गुलाम जंगल में भाग गया। वहां उसने एक शेर देखा। शेर को दर्द हो रहा था। उसके पंजे में एक कांटा फंसा हुआ था। गुलाम व्यक्ति शेर के पास गया और उसका कांटा निकाल लिया। अब शेर का दर्द कम हो गया।
एक दिन गुलाम को उसके मालिक ने पकड़ लिया। उसका मालिक उसे भूखे शेर का सामना करने का आदेश देता है। गुलाम समझ चुका था कि उसकी मृत्यु निश्चित है। लेकिन क्या आश्चर्य हुआ, जब शेर दहाड़ता हुआ आया लेकिन उसने गुलाम को नहीं बल्कि उसके मालिक को मार डाला। यह वही शेर था जिसकी गुलाम ने जान बचाई थी।
3. काम आई होशियारी
एक टोपी बेचने वाला गरीब आदमी एक जंगल से गुजर रहा था। दोपहर का समय था। वह एक पेड़ के नीचे बैठ गया, थकान की वजह से वह उसी पेड़ की छाया में सो गया। उसी समय में कुछ बंदर पेड़ से उतरकर नीचे आए और उसकी सारी टोपियां ले ली। जब टोपी बेचने वाले की आंखें खुली तो वह अपनी टोपियां न पाकर वह चौंक गया। फिर उसने अपना दिमाग लगाया और अपने सिर की टोपी निकाली और नीचे फेंक दी। जब बंदरों ने यह हरकत देखी तो उन सभी ने भी ऐसा ही किया। आखिरकार टोपी वाले की होशियारी काम आई और उसे सारी टोपियां मिल गई, उन सबको इकट्ठा करके वो अपनी अगली यात्रा पर निकल गया।
4. मूर्ख कौआ और चालाक लोमड़ी
एक बार एक कौए को रोटी का एक टुकड़ा मिला, इसे वह अपनी चोंच में रख रहा था। वह एक पेड़ पर बैठा था। अचानक एक लोमड़ी वहां आई तो उसने कौए की चोंच में रोटी का टुकड़ा देखा। लोमड़ी बड़ी चालाक थी, उसने कौए से कहा, 'आपकी आवाज बहुत ही अच्छी और प्यारी है, कृपया गीत गाकर सुनाएं।' मूर्ख कौआ अपनी तारीफ सुनकर बहुत खुश हुआ और गाने के लिए जैसे ही अपना मुंह खोला। रोटी का टुकड़ा नीचे गिर गया। लोमड़ी रोटी का टुकड़ा उठाकर भाग गई और कौआ मूर्ख बन गया।
5. एकता का बल
एक बहुत बूढ़ा आदमी था। उसके 4 बेटे थे। बूढ़ा अपने बेटों को लेकर बहुत चिंतित था, क्योंकि सभी बेटे एक-दूसरे के विरोधी थे और आपस में लड़ते रहते थे। एक दिन बूढ़े ने उन सभी को अपने पास बुलाया और सभी को लकड़ी का एक-एक टुकड़ा दिया और उसे तोड़ने के लिए कहा। सभी ने एक झटके में लकड़ी तोड़ दिया। फिर बूढ़े ने उन्हें लाठी के कुछ टुकड़ों को इकट्ठा एक साथ बांधकर उनको दिया। लेकिन एक भी बेटा उन लाठियों को तोड़ न सका। अब जाकर उन्हें एकता की ताकत समझ में आई। फिर वे मिलजुल कर रहने लगे।

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